रविवार, सितंबर 14, 2025

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ देवरिया के बैनर तले जिले में कार्यरत शिक्षकों द्वारा दिया गया माननीय प्रधानमंत्री जी को संबोधित ज्ञापन

आज देवरिया जिले में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ देवरिया के बैनर तले जिले में कार्यरत शिक्षकों एवं शिक्षक

पदाधिकारियों द्वारा माननीय प्रधानमंत्री जी को संबोधित एक ज्ञापन, जिलाधिकारी देवरिया के माध्यम से प्रेषित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला संयोजक जयशिव प्रताप चन्द ने एवं संचालन नर्वदेश्वर मणि ने किया।
इस ज्ञापन में यह स्पष्ट किया गया है कि सेवा में कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी (TET) परीक्षा अनिवार्य किए जाने का निर्णय न केवल अव्यावहारिक है बल्कि यह शिक्षकों की गरिमा एवं उनके वर्षों के अनुभव को भी आघात पहुँचाता है।

ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि—

1.शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 और आरटीई में दो श्रेणियां हैं। जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि 2010 के पहले के शिक्षकों के लिए की सेवा हेतु  टीईटी अनिवार्य नहीं है। किन्तु इस निर्णय का प्रतिकूल प्रभाव देश के लाखों शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और आजीविका पर पड़ रहा है। जिसके समाधान के लिए सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए।

2. पहले से कार्यरत अध्यापक चयन की वैधानिक प्रक्रिया से नियुक्त हुए हैं और वर्षों से बच्चों को शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।

3. सेवा में रहते हुए टीईटी परीक्षा अनिवार्य करना उनके आत्मसम्मान और स्थिरता पर प्रहार है।

4. यह निर्णय शिक्षा व्यवस्था में अस्थिरता पैदा करेगा और शिक्षकों में अनावश्यक भय व असुरक्षा की स्थिति उत्पन्न करेगा।

5. सरकार को चाहिए कि वह पहले से कार्यरत शिक्षकों को इस नियम से मुक्त (Exempted) रखे।

इस अवसर पर जिला संयोजक जयशिव प्रताप चंद  ने कहा कि अगर सरकार ने इस निर्णय को वापस नहीं लिया तो अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ प्रत्येक शिक्षक की सेवा, सुरक्षा और सम्मान के लिए कटिबद्ध एवं प्रतिबद्ध है। यदि इस ज्ञापन कार्यक्रम के बाद भी सरकार ने यदि समस्या का समाधान नहीं किया तो राष्ट्रीय और प्रदेश नेतृत्व आन्दोलन के अगले चरण का ऐलान करेगा।


जिला सहसंयोजक विवेक मिश्रा ने कहा कि इस प्रकार का निर्णय न सिर्फ वरिष्ठ शिक्षकों के अनुभव का अपमान है अपितु एक प्रकार की नई परम्परा की शुरुआत है जिसे शिक्षक किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा।पूरा शिक्षक समाज इस निर्णय के निराश है सरकार समस्या का त्वरित समाधान करे अन्यथा शिक्षकों को व्यापक स्तर पर आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा । 

जिला इकाई के सदस्य आशुतोष चतुर्वेदी ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखना जितना आवश्यक है उतना ही आवश्यक है उन शिक्षकों के अधिकारों की रक्षा करना और सम्मान की रक्षा करना जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन इस पवित्र शिक्षण कार्य को समर्पित किया है। 

वरिष्ठ शिक्षक नेता मदन शाही ने कहा कि बेसिक शिक्षा विभाग को प्रयोगशाला बना दिया गया है जिसमें शिक्षकों पर निरन्तर प्रयोग किए जा रहे हैं, शिक्षकों के लिए एक भय का वातावरण बना दिया गया है तथा शिक्षकों से अनेक गैर शैक्षणिक कार्य लिए जा रहे हैं, जिससे बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है।

जिला इकाई के सदस्य गोविन्द सिंह ने कहा वर्षों तक निष्ठा पूर्वक अपने शैक्षणिक दायित्व का निर्वहन करने बाद वर्तमान स्थिति बहुत ही पीड़ादायक और शिक्षकों की गरिमा गिराने वाली है। 

जिला इकाई के सदस्य अशोक तिवारी ने कहा कि इस आदेश से प्रदेश के लगभग दो लाख शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं जिनकी आजीविका पर संकट उत्पन्न हो गया है। सरकार को सहानुभूति पूर्वक विचार करते हुए नियमों में संशोधन कर शिक्षकों की सुरक्षा करनी चाहिए।

अन्य शिक्षक संगठनों से मदन सिंह पटेल, विज्ञान सिंह, राजेश मिश्रा आदि ने कार्यक्रम में उपस्थित होकर अपना समर्थन व्यक्त किया।

इस अवसर कोर समिति के सदस्य ज्ञानेश यादव, प्रमोद कुशवाहा,सत्यप्रकाश त्रिपाठी, आशुतोष नाथ तिवारी, शिखर त्रिपाठी, शशांक मिश्र, वागीश मिश्र, अभिषेक जायसवाल, आशुतोष अमन, रजनीकांत त्रिपाठी,ब्लॉक संयोजक मनोज सिंह,अतुल कुमार मिश्र, संतोष कुमार गुप्त,जितेन्द्र कुमार साहू, विनय कुमार त्रिपाठी, देवेन्द्र सिंह, एहसान उल हक़, वीरेन्द्र यादव, रणबीर यादव, संतोष त्रिपाठी, अमरेन्द्र यादव, राम बालक सिंह, ज्योति गुप्ता, ओमप्रकाश प्रसाद, प्रत्युष राय,दुर्गेशवर, अनुज , राघवेन्द्र, सहित हजारों की संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे और उन्होंने अपनी एकजुटता व्यक्त की।

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