शनिवार, सितंबर 27, 2025

महाष्टमी अवकाश हेतु राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, जनपद देवरिया के जिला संयोजक ने आज जिलाधिकारी महोदया को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन मेंबताया गया कि जिला मजिस्ट्रेट अवकाश कैलेंडर में 30 सितम्बर 2025 (महाष्टमी) को सार्वजनिक अवकाश घोषित है, किंतु बेसिक शिक्षा विभाग की अवकाश सूची में यह तिथि शामिल नहीं है।

इस विसंगति के कारण शिक्षकों, छात्र-छात्राओं एवं अभिभावकों में असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो रही है। महासंघ ने जिलाधिकारी महोदय से मांग की है कि महाष्टमी के अवसर पर सभी परिषदीय एवं मान्यता प्राप्त विद्यालयों में अवकाश घोषित करने का आदेश जारी किया जाए।

महासंघ ने कहा कि महाष्टमी धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, अतः अवकाश की घोषणा से विद्यालयों में एकरूपता बनी रहेगी और अनावश्यक भ्रम की स्थिति समाप्त होगी।




Update - राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के मांग पत्र दिनांक 27 सितंबर के आधार पर जिलाधिकारी महोदया ने दुर्गाष्टमी की छुट्टी को स्वीकृति हेतु बीएसए महोदय को भेजा। 

पत्र के क्रम में BSA महोदया द्वारा दुर्गाष्टमी पर दिनांक 30 सितम्बर 2025 को अवकाश हेतु आदेश निर्गत किया गया।

आप समस्त को शारदीय नवरात्रि की पुनः बहुत-बहुत शुभकामनाएं।


सादर-

टीम राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ,

जनपद देवरिया।

रविवार, सितंबर 14, 2025

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ देवरिया के बैनर तले जिले में कार्यरत शिक्षकों द्वारा दिया गया माननीय प्रधानमंत्री जी को संबोधित ज्ञापन

आज देवरिया जिले में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ देवरिया के बैनर तले जिले में कार्यरत शिक्षकों एवं शिक्षक

पदाधिकारियों द्वारा माननीय प्रधानमंत्री जी को संबोधित एक ज्ञापन, जिलाधिकारी देवरिया के माध्यम से प्रेषित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला संयोजक जयशिव प्रताप चन्द ने एवं संचालन नर्वदेश्वर मणि ने किया।
इस ज्ञापन में यह स्पष्ट किया गया है कि सेवा में कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी (TET) परीक्षा अनिवार्य किए जाने का निर्णय न केवल अव्यावहारिक है बल्कि यह शिक्षकों की गरिमा एवं उनके वर्षों के अनुभव को भी आघात पहुँचाता है।

ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि—

1.शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 और आरटीई में दो श्रेणियां हैं। जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि 2010 के पहले के शिक्षकों के लिए की सेवा हेतु  टीईटी अनिवार्य नहीं है। किन्तु इस निर्णय का प्रतिकूल प्रभाव देश के लाखों शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और आजीविका पर पड़ रहा है। जिसके समाधान के लिए सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए।

2. पहले से कार्यरत अध्यापक चयन की वैधानिक प्रक्रिया से नियुक्त हुए हैं और वर्षों से बच्चों को शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।

3. सेवा में रहते हुए टीईटी परीक्षा अनिवार्य करना उनके आत्मसम्मान और स्थिरता पर प्रहार है।

4. यह निर्णय शिक्षा व्यवस्था में अस्थिरता पैदा करेगा और शिक्षकों में अनावश्यक भय व असुरक्षा की स्थिति उत्पन्न करेगा।

5. सरकार को चाहिए कि वह पहले से कार्यरत शिक्षकों को इस नियम से मुक्त (Exempted) रखे।

इस अवसर पर जिला संयोजक जयशिव प्रताप चंद  ने कहा कि अगर सरकार ने इस निर्णय को वापस नहीं लिया तो अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ प्रत्येक शिक्षक की सेवा, सुरक्षा और सम्मान के लिए कटिबद्ध एवं प्रतिबद्ध है। यदि इस ज्ञापन कार्यक्रम के बाद भी सरकार ने यदि समस्या का समाधान नहीं किया तो राष्ट्रीय और प्रदेश नेतृत्व आन्दोलन के अगले चरण का ऐलान करेगा।


जिला सहसंयोजक विवेक मिश्रा ने कहा कि इस प्रकार का निर्णय न सिर्फ वरिष्ठ शिक्षकों के अनुभव का अपमान है अपितु एक प्रकार की नई परम्परा की शुरुआत है जिसे शिक्षक किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा।पूरा शिक्षक समाज इस निर्णय के निराश है सरकार समस्या का त्वरित समाधान करे अन्यथा शिक्षकों को व्यापक स्तर पर आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा । 

जिला इकाई के सदस्य आशुतोष चतुर्वेदी ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखना जितना आवश्यक है उतना ही आवश्यक है उन शिक्षकों के अधिकारों की रक्षा करना और सम्मान की रक्षा करना जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन इस पवित्र शिक्षण कार्य को समर्पित किया है। 

वरिष्ठ शिक्षक नेता मदन शाही ने कहा कि बेसिक शिक्षा विभाग को प्रयोगशाला बना दिया गया है जिसमें शिक्षकों पर निरन्तर प्रयोग किए जा रहे हैं, शिक्षकों के लिए एक भय का वातावरण बना दिया गया है तथा शिक्षकों से अनेक गैर शैक्षणिक कार्य लिए जा रहे हैं, जिससे बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है।

जिला इकाई के सदस्य गोविन्द सिंह ने कहा वर्षों तक निष्ठा पूर्वक अपने शैक्षणिक दायित्व का निर्वहन करने बाद वर्तमान स्थिति बहुत ही पीड़ादायक और शिक्षकों की गरिमा गिराने वाली है। 

जिला इकाई के सदस्य अशोक तिवारी ने कहा कि इस आदेश से प्रदेश के लगभग दो लाख शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं जिनकी आजीविका पर संकट उत्पन्न हो गया है। सरकार को सहानुभूति पूर्वक विचार करते हुए नियमों में संशोधन कर शिक्षकों की सुरक्षा करनी चाहिए।

अन्य शिक्षक संगठनों से मदन सिंह पटेल, विज्ञान सिंह, राजेश मिश्रा आदि ने कार्यक्रम में उपस्थित होकर अपना समर्थन व्यक्त किया।

इस अवसर कोर समिति के सदस्य ज्ञानेश यादव, प्रमोद कुशवाहा,सत्यप्रकाश त्रिपाठी, आशुतोष नाथ तिवारी, शिखर त्रिपाठी, शशांक मिश्र, वागीश मिश्र, अभिषेक जायसवाल, आशुतोष अमन, रजनीकांत त्रिपाठी,ब्लॉक संयोजक मनोज सिंह,अतुल कुमार मिश्र, संतोष कुमार गुप्त,जितेन्द्र कुमार साहू, विनय कुमार त्रिपाठी, देवेन्द्र सिंह, एहसान उल हक़, वीरेन्द्र यादव, रणबीर यादव, संतोष त्रिपाठी, अमरेन्द्र यादव, राम बालक सिंह, ज्योति गुप्ता, ओमप्रकाश प्रसाद, प्रत्युष राय,दुर्गेशवर, अनुज , राघवेन्द्र, सहित हजारों की संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे और उन्होंने अपनी एकजुटता व्यक्त की।

रविवार, अगस्त 31, 2025

विद्यालयों में गूंजा उद्घोष – “हमारा विद्यालय, हमारा स्वाभिमान” शिक्षकों और विद्यार्थियों ने लिया पंच संकल्प

अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के आह्वान पर दिनांक 01 सितम्बर 2025 को देशभर के विद्यालयों में
“हमारा विद्यालय – हमारा स्वाभिमान” संकल्प कार्यक्रम का भव्य आयोजन हुआ। इस अवसर पर लाखों शिक्षक एवं करोड़ों विद्यार्थियों ने विद्यालय प्रार्थना सभाओं में पाँच संकल्प लेकर एक स्वर में “हमारा विद्यालय – हमारा स्वाभिमान” का उद्घोष किया और उसे आत्मसात किया।


प्रदेश इकाई के निर्देशानुसार जनपद देवरिया के 1298 परिषदीय विद्यालयों में भी यह कार्यक्रम उत्साहपूर्वक सम्पन्न हुआ, जिसमें लगभग 4838 शिक्षक एवं 89737 विद्यार्थी शामिल हुए। इसके अतिरिक्त निजी विद्यालयों में भी यह कार्यक्रम हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।


जिला संयोजक जयशिव प्रताप चन्द ने बताया कि विद्यालयों में लिया गया पंच संकल्प – स्वच्छता, अनुशासन, समय का सदुपयोग, चरित्र निर्माण, आत्म विकास, समाज सेवा, समरसता और राष्ट्र प्रेम – प्रत्येक विद्यार्थी व शिक्षक के हृदय में विद्यालय के प्रति तीर्थ का भाव जागृत करेगा। यह संकल्प विद्यालय और समाज के बीच जीवंत सेतु का कार्य करेंगे।


जिला सह-संयोजक विवेक मिश्र ने कहा कि जनपद में “हमारा विद्यालय – हमारा स्वाभिमान” कार्यक्रम जिस तरह से स्वतःस्फूर्त और सफलता पूर्वक संपन्न हुआ, वह संगठन द्वारा विगत तीन वर्षों से शिक्षा और शिक्षक हित में किए जा रहे सकारात्मक प्रयासों का प्रतिफल है। विद्यार्थियों और शिक्षकों द्वारा लिया गया साझा संकल्प विद्यालय एवं स्थानीय समुदाय के बीच सामुदायिक सहभागिता को और मजबूत करेगा।


कार्यक्रम संयोजक आशुतोष नाथ तिवारी के अनुसार यह संकल्प कार्यक्रम शिक्षा को न केवल उद्देश्यपूर्ण बनाएगा, बल्कि चरित्र निर्माण, व्यक्ति निर्माण एवं राष्ट्र पुनर्निर्माण का मार्ग भी प्रशस्त करेगा। विद्यार्थी व शिक्षक मिलकर शैक्षिक उन्नयन और राष्ट्रीय विकास में सक्रिय भूमिका निभाएँगे।


कार्यक्रम की सफलता में जिला इकाई के आशुतोष चतुर्वेदी, सह-संयोजक अमृता मिश्र, राघवेन्द्र कुशवाहा, आशुतोष मिश्र ‘अमन’, जिला इकाई के अशोक तिवारी, शशांक मिश्र, गोविंद सिंह, प्रमोद कुशवाहा, नर्वदेश्वर मणि, ज्ञानेश यादव, शिखर शिवम, अभिषेक जायसवाल, रजनीकांत, वागीश मिश्र सहित सभी ब्लॉक इकाइयों एवं न्याय पंचायत प्रभारियों का सराहनीय योगदान रहा।

बुधवार, जुलाई 16, 2025

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ देवरिया ने विद्यालय युग्मन के खिलाफ दिया जिलाधिकारी को ज्ञापन

आज दिनांक 16 जुलाई 2025 को राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ देवरिया ने जिला संयोजक जयशिव प्रताप चंद के नेतृत्व में
जिलाधिकारी महोदया से मुलाकात की। संगठन ने अपने पूर्व पत्राचार का हवाला देते हुए बताया कि 50 से कम छात्रसंख्या वाले विद्यालयों को अन्य विद्यालयों में मर्ज कर दिया गया है, जिससे दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों, विशेष रूप से छात्राओं की शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। संगठन ने अनुरोध किया कि 50 से अधिक नामांकन वाले जिन विद्यालयों को भी अन्य स्कूलों में विलय किया गया है, उन्हें पुनः पूर्व स्थिति में बहाल किया जाए।

 14 जुलाई 2025 को मुख्यमंत्री जी द्वारा आयोजित समीक्षा बैठक में निर्देश दिया गया था कि "जिन विद्यालयों में 50 से अधिक छात्र-छात्राएं अध्यनरत हैं, उन्हें स्वतंत्र विद्यालय के रूप में संचालित किया जाए"। इस निर्देश का अनुपालन जनपद देवरिया में भी सुनिश्चित कराने की मांग की गई।

प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को अवगत कराया कि इस विलय नीति के कारण विशेष रूप से ग्रामीण, दलित, पिछड़े और बालिका शिक्षा प्रभावित हो रही है।

इसके अलावा गैर मान्यता प्राप्त विद्यालयों और मानक विहीन मान्यता प्राप्त विद्यालयों के संचालन पर रोक लगाने तथा शिक्षकों को BLO ड्यूटी से मुक्त करने हेतु भी पत्रक दिया गया।

जिस पर जिलाधिकारी महोदया ने 50 से अधिक नामांकन वाले स्कूलों का युग्मन न किए जाने का अनुरोध करने पर सकारात्मक सहमति व्यक्त कीं और 50 से कम नामांकन वाले स्कूलों जिन स्कूलों का अव्यवहारिक युग्मन किया गया है उनका स्थलीय सत्यापन कर निस्तारित करने हेतु बीएसए से कहीं। साथ ही जिलाधिकारी महोदया ने बिना मान्यता प्राप्त स्कूलों और मानक विहीन मान्यता प्राप्त स्कूलों की जांच एवं उचित कार्यवाही हेतु अपर जिलाधिकारी प्रशासन सर को निर्देशित कीं।

सोमवार, जुलाई 07, 2025

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के नेतृत्व में हजारों शिक्षकों ने युग्मन नीति के खिलाफ किया ज़बरदस्त प्रदर्शन

 शिक्षा सिर्फ किताबों और दीवारों तक सीमित नहीं होती, यह एक बच्चे का भविष्य, एक गाँव की आत्मा और पूरे

राष्ट्र की नींव होती है। लेकिन जब उस नींव को ही हिला देने वाला कोई फैसला हो, तो आवाज़ उठना स्वाभाविक है। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा किए जा रहे विद्यालय युग्मन (पेयरिंग) के फैसले ने प्रदेशभर के शिक्षकों को झकझोर कर रख दिया है।

इसी क्रम में आज देवरिया ज़िले में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक दृश्य देखने को मिला, जब राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के नेतृत्व में हजारों शिक्षकों ने युग्मन नीति के खिलाफ ज़बरदस्त प्रदर्शन किया। हाथों में तख्तियां, आँखों में चिंता और दिल में विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर आक्रोश—यह प्रदर्शन सिर्फ एक विरोध नहीं, बल्कि बच्चों के अधिकारों की पुकार थी।

मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया

बीएसए कार्यालय से शुरू हुआ यह विरोध मार्च नारेबाजी के साथ जिलाधिकारी कार्यालय तक पहुँचा, जहाँ शिक्षकों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। महासंघ के ज़िला संयोजक जयशिव प्रताप चंद ने कहा कि यह ज्ञापन केवल शिक्षकों का नहीं, बल्कि उन बच्चों का प्रतिनिधित्व करता है जिनकी शिक्षा इस नीति से बुरी तरह प्रभावित होगी।

उन्होंने कहा, “बिना भौतिक सर्वेक्षण, ग्राम सभा और SMC की सहमति के युग्मन का यह निर्णय न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों का अपमान है, बल्कि ग्रामीण व गरीब छात्रों के शिक्षा के अधिकार के साथ अन्याय है।”

शिक्षकों का गुस्सा फूटा — “छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं”

जिला सहसंयोजक विवेक मिश्रा ने कहा, “इस प्रकार का मनमाना आदेश शिक्षक समाज को स्वीकार नहीं है। यदि अब आवाज़ नहीं उठाई गई, तो भविष्य में नौकरियों पर भी संकट आ सकता है।“

गोविन्द सिंह ने इसे आरटीई एक्ट 2009 के खिलाफ बताते हुए कहा, “विद्यालय केवल भवन नहीं होते, वे गाँव की आत्मा होते हैं। बच्चियाँ जो पहले विद्यालय जाती थीं, वे दूरी बढ़ने पर पढ़ाई से वंचित हो जाएँगी।”

अशोक तिवारी ने प्रशासन की अनदेखी पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा, “छात्र संख्या में पहले से ही बढ़ोत्तरी हो रही है। अप्रैल 2025 की संख्या के आधार पर युग्मन करना अव्यवहारिक है, जबकि सितंबर 2025 तक का समय दिया जाना चाहिए।”

आशुतोष चतुर्वेदी ने कहा, “दूरी बढ़ने से ड्रॉपआउट की दर बढ़ेगी और पोषण, स्वास्थ्य, व उपस्थिति पर भी गहरा असर पड़ेगा। हम समावेशी शिक्षा चाहते हैं, अलगाव नहीं।”

एकजुट हुआ शिक्षक समाज — महिला शिक्षक संघ, अनुदेशक संघ सहित कई संगठन शामिल

इस विरोध प्रदर्शन में अनुदेशक संघ, शिक्षामित्र संघ, महिला शिक्षक संघ और अटेवा जैसे कई संगठनों ने हिस्सा लिया। मंच से विज्ञान सिंह, नीलम सिंह, मदन पटेल, अभिषेक गुप्ता और जय सिंह यादव ने शिक्षकों की भावनाओं को स्वर देते हुए सरकार से युग्मन नीति वापस लेने की माँग की।

हज़ारों की संख्या में जुटे शिक्षक

इस प्रदर्शन में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की ज़िला और ब्लॉक इकाईयों के हज़ारों शिक्षक-शिक्षिकाओं ने भाग लिया। प्रदर्शन में सत्यप्रकाश त्रिपाठी, आशुतोष नाथ तिवारी, शशांक मिश्र, ज्ञानेश यादव, प्रमोद कुशवाहा, वागीश दत्त मिश्र समेत अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।

ब्लॉक स्तर से भी जितेन्द्र साहू, देवेन्द्र सिंह, एहसान उल हक, वीरेन्द्र यादव, संतोष त्रिपाठी समेत समस्त संयोजकों ने अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई।