शुक्रवार, अगस्त 30, 2024

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने बेसिक शिक्षा अधिकारी को दिया ज्ञापन

 सम्मानित शिक्षक साथियों, आत्मीय अभिवादन!🙏🏼

आज राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ का प्रतिनिधिमंडल जिला संयोजक जय शिव प्रताप चंद के नेतृत्व में जिला बेसिक

शिक्षा अधिकारी महोदया से मिला व शिक्षकों की निम्न समस्याओं की ओर उनका ध्यान आकृष्ट कराया-

1. समायोजन की विसंगतियों का निस्तारण करने हेतु।

2. अवैध विद्यालयों के संचालन पर तत्काल रोक लगाने हेतु।

3. 50 से कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों के अध्यापकों की सैलरी रोकने या प्रतिकूल प्रविष्टि देने पर रोक लगाने हेतु।

4. कक्षा 1 में नवीन नामांकन हेतु आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को आदेश जारी करने हेतु।

5. एफ•एल•एन प्रशिक्षण-2023 के बकाया मानदेय भुगतान के साथ-साथ वर्तमान में जारी प्रशिक्षण का भुगतान भी ससमय किए जाने हेतु।

6. सफाई कर्मियों द्वारा प्रतिदिन विद्यालय की साफ-सफाई सुनिश्चित कराए जाने के संबंध में आदेश जारी करवाने हेतु।

7. बीएलओ कार्य में अन्य विभागों के कार्मिकों का योगदान प्रतिशत बढ़ाए जाने हेतु।

8. नियमानुसार नगर क्षेत्र के अध्यापकों का समायोजन नगर क्षेत्र में किए जाने हेतु।

9. माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेश के क्रम में MRC के तहत 68,500 भर्ती में चयनित अध्यापकों की प्रथम नियुक्ति को ही मानव संपदा पर मौलिक नियुक्ति के रूप में दर्ज करने हेतु।

10. शिक्षक द्वारा दिये गए प्रार्थना-पत्रों का निस्तारण दो हफ्ते के भीतर किए जाने हेतु।


महोदया द्वारा उक्त समस्त शिक्षक समस्याओं के त्वरित निस्तारण का आश्वासन दिया गया।


सादर-

टीम राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ,

जनपद-देवरिया।

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने वित्त एवं लेखा अधिकारी को दिया ज्ञापन

 सम्मानित शिक्षक साथियों, आत्मीय अभिवादन!🙏🏼

आज राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिला-संयोजक जयशिव प्रताप चंद अपनी कार्यकारिणी के साथ वित्त एवं लेखा
अधिकारी महोदय से मुलाकात मिले तथा निम्न वित्तीय समस्याओं के समाधान हेतु उनका ध्यान आकृष्ट कराया-

1. जनवरी व फरवरी 2024 के बकाया DA का भुगतान जल्द किया जाए।

2. शिक्षकों के बकाया एरियर का भुगतान हर माह की 15 तारीख तक करा दिया जाए।

3. एनपीएस अंशदान हरहाल प्रति माह क्रेडिट किया जाए।

4. अध्यापकों के छूटे या डिडक्ट हुए एनपीएस अंशदान को अद्यतन किया जाए।

5. सितंबर माह तक प्रान किट का वितरण सुनिश्चित किया जाए।

6. शिक्षकों के प्रार्थना पत्रों का निस्तारण प्राप्ति के दो सप्ताह के भीतर किया जाए।

7. कार्यालय में कार्यरत समस्त पटल सहायकों के नाम,उनके कार्य व मोबाइल नंबर संगठन को उपलब्ध कराए जाएं।

 

जिला संयोजक द्वारा वित्त एवं लेखाधिकारी महोदय को उक्त समस्याओं का ससमय समाधान न मिलने की दशा में निकट भविष्य में धरना/प्रदर्शन आयोजित करने हेतु भी अवगत कराया गया।


सादर-

टीम राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ,

जनपद-देवरिया

मंगलवार, जुलाई 16, 2024

बेसिक शिक्षा परिषद के अध्यापकों की आनलाइन हाजिरी स्थगित- राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ एवं शिक्षकों की एकता का परिणाम

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रयासों एवं शिक्षकों के धरने प्रदर्शन के कारण सरकार को ऑनलाइन अटेंडेंस व्यवस्था
स्थगित करनी पड़ी है। बेसिक शिक्षा परिषद में कार्यरत शिक्षकों ने इस व्यवस्था का भारी विरोध किया, जिसके परिणामस्वरूप सरकार ने यह निर्णय लिया।
बीते कुछ दिनों से, प्रदेश में लाखोँ शिक्षक ऑनलाइन अटेंडेंस प्रणाली के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे। उनका कहना था कि इस प्रणाली में कई तकनीकी खामियां हैं और यह उनके कामकाज में बाधा उत्पन्न कर रही है। साथ ही, इसे लागू करने में आने वाली समस्याओं और इसके प्रभावी होने पर भी सवाल उठाए गए।

शिक्षकों का मानना है कि ऑनलाइन अटेंडेंस प्रणाली से उनके अधिकारों का हनन हो रहा है और इससे शिक्षण की गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है। इसके विरोध में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने सरकार को ज्ञापन सौंपा और धरने प्रदर्शन का आयोजन किया। 

सरकार ने शिक्षकों की मांगों को ध्यान में रखते हुए और उनकी चिंताओं का समाधान करने के लिए फिलहाल इस व्यवस्था को स्थगित करने का निर्णय लिया है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि वे इस मुद्दे पर शिक्षकों के साथ चर्चा करेंगे और उनकी समस्याओं का समाधान निकालने की कोशिश करेंगे।

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिलाध्यक्ष जयशिव प्रताप चंद ने इस फैसले का स्वागत किया है और कहा है कि यह शिक्षकों की एकता और संघर्ष का परिणाम है। परंतु उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि आनलाइन उपस्थिति के साथ साथ अन्य सभी आनलाइन कार्यों का बहिष्कार मांगे न मानने तक जारी रहेगा। सरकार का यह निर्णय समस्या का समाधान ना होकर शिक्षक एकता को खंडित करने का प्रयास भी हो सकता है। 
उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी सरकार शिक्षकों की समस्याओं को गंभीरता से लेगी और उनके हितों की रक्षा करेगी।उन्होंने कहा की राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश का शीर्ष नेतृत्व पहले माननीय मुख्यमंत्री जी से मिला पुनः कल राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश का प्राथमिक संवर्ग महानिदेशक महोदया से मिलकर 13 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। अंततः आप साथियों की विजय हुई, लेकिन जबतक माँगें ना मान लीं जाएँ,हमारी प्रदेश की टीम आप के हितों हेतु यू ह बेबाक़ी से लीड लेती रहेगी। अभी समस्या समाधान तक महासंघ का विरोध पूर्व की भाँति जारी रहेगा।  उन्होंने संकुल शिक्षकों, ARP एवं विभिन्न शिक्षक संगठनों के लोगों के सहयोग हेतु धन्यवाद दिया जिन्होंने शिक्षक के इन समस्याओं के मुद्दे पर एकजुटता बनाई रखी और सहयोग दिया। 
उन्होंने शिक्षकों के नाम भेजें अपने संबोधन में कहा कि

सम्मानित शिक्षक, शिक्षिका, अनुदेशक, शिक्षामित्र भाई बहन, 

आपकी एकता और साहस ने जिस प्रकार से व्यवस्था के अव्यवहारिक आदेश के खिलाफ हमारी आवाज को बुलंद किया, उसके लिए हम हृदय से आभारी हैं। आपके अदम्य संकल्प और दृढ़ता ने इस आंदोलन के सफलता की नींव रखी, और हमारे अधिकारों की रक्षा का मार्ग प्रशस्त किया। यह आपकी दृढ़ निष्ठा का ही परिणाम है कि सरकार ने अस्थाई रूप से अपने निर्णय पर रोक लगाने के लिए विवश हुई।
हम इस ऐतिहासिक जीत के लिए आप सभी को धन्यवाद ज्ञापित करते हैं। यह संघर्ष मात्र एक प्रारंभिक कदम है, और हमें भविष्य में आने वाली चुनौतियों के लिए सतत् सजग और संगठित रहना होगा। आपके अद्वितीय योगदान और समर्पण ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब हम सभी एकजुट होकर किसी भी अन्याय के खिलाफ खड़े होते हैं, तो हम उसे पराजित कर सकते हैं।

इस विजय की अभिलाषा को संजोए रखते हुए, हम सभी को एक नए उत्साह और ऊर्जा के साथ आगे बढ़ना होगा। शिक्षा क्षेत्र में शिक्षकों के न्याय और सम्मान के लिए हमारा संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ है। हमें अपने अधिकारों और भविष्य की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहना होगा।
आप सभी को पुनः हार्दिक धन्यवाद और भविष्य के संघर्ष हेतु शुभकामनाएं।

यह निर्णय शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि शिक्षकों की आवाज़ को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अब सभी की नजरें सरकार और शिक्षकों के बीच होने वाली आगामी वार्ताओं पर टिकी हैं, जिसमें ऑनलाइन अटेंडेंस व्यवस्था के भविष्य का निर्धारण किया जाएगा।

सोमवार, जुलाई 15, 2024

देवरिया जनपद के सभी ब्लॉक के संकुल शिक्षकों ने दिया संकुल पद से सामूहिक इस्तीफा.

जिले के विभिन्न ब्लॉक के लगभग 885 शिक्षकों ने संकुल शिक्षक के पद से सामूहिक त्यागपत्र दे दिया। शिक्षक

संकुल की नियुक्ति न्याय पंचायत स्तर पर गुणवत्ता संवर्द्धन हेतु वर्ष 2020 में हुई थी। उ0प्र0 सरकार केशासनादेश संख्या 123/68-05-2020 दिनांक 17 मार्च, 2020 के बिंदु संख्या- 5.2 तथा महानिदेशक, स्कूल शिक्षा व राज्य परियोजना कार्यालय के पत्र पत्रांक- गुण0वि0/शिक्षक संकुल/3966/2020-21 दिनांक- 07 सितम्बर,2020 के बिंदु संख्या- 14 के अनुसार "एक शिक्षक संकुल का कार्यकाल 01 वर्ष का होगा।परफॉर्मेंस रिव्यू के आधार पर यदि संकुल का कार्य बेहतर पाया जाता है तो अगले वर्ष पुनः कार्य करने का मौका दिया जाएगा।कोई एक सदस्य अधिकतम 02 वर्ष तक लगातार शिक्षक संकुल रह सकता है।"

संकुल शिक्षकों का कहना है कि इन नियमों के अनुसार संकुल शिक्षकों की नियुक्ति के पश्चात लगतार चौथे साल हम सभी से कार्य लिया जा रहा है, जो कि शासनादेश का उल्लंघन हैचूंकि शिक्षक संकुल की नियुक्ति शिक्षा की गुणवत्ता संवर्द्धन तथा विद्यालयों के प्रदर्शन बेहतर करने हेतु की गई थी जबकि शिक्षक संकुलों पर हमेशा अनावश्यक दबाव बना के इसके इतर अनेक कार्य समय-समय पर लिए जाते हैं, जिन कार्यो का सम्बंध शिक्षक संकुल के कार्य व दायित्व की सीमा में नही आता।

अचानक से जिले के सभी संकुल शिक्षकों के अपने पद से त्यागपत्र देने से बेसिक शिक्षा विभाग में बहुत बड़ा उथल-पुथल हो गया है। कार्यालय का न्याय पंचायत स्तर से सीधे सम्बन्ध का पूरा नेटवर्क एक झटके में ही टूट गया है जिससे बेसिक शिक्षा विभाग हलकान है।

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने जनपद के समस्त विकास खण्ड के लगभग सभी शिक्षक संकुल के अपने पदीय दायित्व से हटने की कार्यवाही को शिक्षक हित में बड़ा कदम बताया है। जिला संयोजक जयशिव प्रताप चंद ने कहा कि  शासनादेश  के खिलाफ  जाकर संकुल शिक्षकों से जबरिया कार्य  लिया जा रहा है जो उनका मानसिक शोषण है. इस प्रकार के अनावश्यक दबाव व डिजिटाइजेशन के विरोध में संकुलों के इस्तीफे का संगठन शिक्षक हित में इस कदम का स्वागत करता है।कि

शनिवार, अप्रैल 27, 2024

दम्पती शिक्षक में से किसी एक और गंभीर रूप से बीमार शिक्षकों को निर्वाचन ड्यूटी से मुक्त करने के लिए सीडीओ से मिले महासंघ के प्रतिनिधि

आज राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ देवरिया की जिला इकाई ने संयोजक जयशिव प्रताप चन्द के नेतृत्व में सीडीओ से मिलकर दम्पती शिक्षकों में से एक (महिला शिक्षिकाओं), गंभीर रूप से बीमार शिक्षकों और छोटे बच्चों की माताओं को निर्वाचन ड्यूटी से मुक्त करने की मांग किया। 

जिला संयोजक ने कहा कि ऐसे मतदान कर्मी शिक्षकों को निर्वाचन आयोग के निर्देशों और मानवीय आधार पर राहत प्रदान किया जाए। प्रदेश में भीषण गर्मी और हीट वेव के चलते ऐसे कार्मिकों द्वारा निर्वाचन ड्यूटी कर पाना काफी कठिन है। दम्पती कार्मिक के लिए निर्वाचन आयोग ने हाल में आदेश जारी किया था। इसके अलावा  निर्वाचन ड्यूटी के दौरान गर्मी और लू से बचाव के पूरे इंतजाम करने का भी अनुरोध किया।

सह संयोजक विवेक मिश्र ने कहा कि मौसम की प्रतिकूलता को देखते हुए मतदान कर्मियों का द्वितीय चरण का प्रशिक्षण ग्रीष्मावकाश से पहले ही पूरा कर लिया जाय। अनेक कार्मिकों गैर जनपद निवासी हैं। इसलिए ग्रीष्मावकाश में प्रशिक्षण आयोजित करने से उन्हें भी दिक्कतें होंगी।

इस दौरान अशोक तिवारी, शशांक मिश्र, विवेक मिश्र, गोविंद सिंह,आशुतोष चतुर्वेदी, नर्वदेश्वर मणि, वागीश मिश्र, सत्य प्रकाश त्रिपाठी, प्रमोद कुशवाहा, आशुतोष नाथ तिवारी, अभिषेक जायसवाल ज्ञानेश यादव आदि उपस्थित रहे।